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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 31
स्थानकल्यधनहा दशर्क्षगस्तत्प्रदो भवति लाभगो गुरुः । द्वादशेऽ ध्वनि विलोमदुःखभाग् याति यद्यपि नरो रथोद्धतः ॥
दशम राशि में स्थित बृहस्पति स्थान, आरोग्य और धन का नाश करने वाला होता है। एकादश राशि में स्थित बृहस्पति स्थान, आरोग्य और धन को देने वाला होता है। द्वादश राशि में स्थित बृहस्पति हो तो रथ पर चढ़ा हुआ मनुष्य भी मार्ग में कुपथ-गमन के कारण दुःख भोगता है। यह रथोद्धता छन्द है।
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