त्रिदशगुरुः शयनं रतिभोगं धनमशनं कुसुमान्युपवाह्यम् । जनयति सप्तमराशिमुपेतो ललितपदां च गिरं धिषणां च ॥
यदि बृहस्पति सातवीं राशि में स्थित हो तो शय्या, सुरतभोग, धन, भोजन, वाहन
तथा ललित पद वाली वाणी और बुद्धि करता है। यह ललितपद छन्द है।
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