जनयति च तनयभवनमुपगतः परिजनशुभसुतकरितुरगवृषान् । सकनकपुरगृहयुवतिवसनकृन्मणिगुणनिकरकृदपि विबुधगुरुः ॥
पञ्चम भवनगत बृहस्पति परिजन, धर्मादि, पुत्र, हाथी, घोड़ा और बैल का लाभ तथा सुवर्ण, नगर, गृह, स्त्री, वत्र और मणियों के समूहों का लाभ करता है। यह मणिगुणनिकर छन्द है।
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