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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 24
धनसुतसुखयोषिन्मिन्त्रवाहाप्तितुष्टि- स्तुहिनकिरणपुत्रे लाभगे मृष्टवाक्यः । महगोचराध्यायः रिपुपरि भवरोगैः पीडितो द्वादशस्थे ५९१ न सहति परिभोक्तुं मालिनीयोगसौख्यम् ॥
यदि जन्मराशि से ग्यारहवीं राशि में बुध स्थित हो तो धन, पुत्र, सुख, खी, मित्र उथा बाहन को प्राप्ति करने वाला, सन्तुष्ट और मधुर बोलने वाला होता है। यदि बारहवीं राशि में बुध हो तो शत्रु, अनादर और रोग से पीड़ित होता है तथा माला धारण करने बाली सी के संगम का सुख भोगने के लिये समर्थ नहीं होता है। यह मालिनी छन्द है॥
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