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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 19
दुष्टवाक्यपिशुनाहितभेदैर्बन्धनैः सकलहैश्च हृतस्वः । जन्मगे शशिसुते पथि गच्छन् स्वागतेऽपि कुशलं न शृणोति ॥
जिसके जन्मराशि में बुध हो, यह मनुष्य कठोर वाक्य, चुगुलखोरी, शत्रुता और पारस्परिक भेद से नष्ट धन वाला होता है तथा उसके शुभागमन में भी कुशलवार्ता कोई नहीं सुनता है। यह स्वागता छन्द है।
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