मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 17
दशमगृहगते समं महीजे विविधधनाप्तिरुपान्त्यगे जयश्च । जनपदमुपरि स्थितश्च भुङ्क्ते वनमिव षट्चरणः सुपुष्पिताग्रम् ॥
यदि जन्मराशि से दशम स्थान में मंगल हो तो मध्यम फल और एकादश में हो तो अनेक प्रकार के धन की प्राप्ति और जय होती है तथा पुष्पित अग्रभाग वाले वृक्षों से युत वन में भ्रमर की तरह लोगों में प्रधान होकर भोग करता है। यह सुपुष्पिताग्र छन्द है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें