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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 16
कलत्रकलहाक्षिरुग्जठर रोगकृत् क्षरत्क्षतज अक्षितः क्षपितवित्तमानोऽष्टमे । कुजे नवमसंस्थिते परिभवार्थनाशादिभि- र्विलम्बितगतिर्भवत्यबलदेहधातुक्लमैः ॥
उदररोग होता है। अष्टम में हो तो निकलते हुये रुधिर से विवर्ण शरीर, धन और मान का नाश करता है। जिसके नवम में मंगल हो वह पराभव, अर्थनाश आदि से शरीर में निर्बलता और धातुओं के क्षय से मन्दगति वाला हो जाता है। यह विलम्बितगति छन्द है।
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