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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 13
भवति धरणिजे चतुर्थगे ज्वरजठरगदासृगुद्भवः । कुपुरुषजनिताच्च सङ्गमात् प्रसभमपि करोति चाशुभम् ॥
यदि मंगल चतुर्थ राशि में स्थित हो तो ज्वर, उदररोग, रक्तविकार और निन्दित पुरुष के साथ समागम से दृढ़तापूर्वक अशुभ करता है। यह प्रसभ छन्द है।
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