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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 11
कुजेऽभिघातः प्रथमे द्वितीये नरेन्द्रपीडाकलहारिदोषैः । भृशं च पित्तानलचौररोगैरुपेन्द्रवज्रप्रतिमोऽपि यः स्यात् ॥
यदि जन्मराशि में मंगल हो तो उपद्रव और द्वितीय में हो तो राजपीड़ा, कलहदोष, शत्रुदोष, धातुदोष, अग्नि, चोर, रोग- इन सबों से इन्द्रवज्र-सम कठोर मनुष्य को भी अतिशय उपघात करता है। यह उपेन्द्रवज्रा छन्द है।
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