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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 9
धर्मे स्थिता भृगुदिवाकर भूमिपुत्रा जीवश्च धर्मनिरतां शशिजस्त्वरोगाम् । राहुच सूर्यतनयश्च करोति बन्थ्यां कन्याप्रसूतिमटनां कुरुते शशाङ्कः ॥
यदि विवाहकाल में लग्न से नवम स्थान में शुक्र, सूर्य, मंगल या गुरु हो तो लो को धर्म करने बाली, बुध हो तो नीरोग, राहु और शनि हो तो बन्ध्या तथा चन्द्र हो तो कन्या उत्पत्र करने वाली और घूमने वाली बनाता है।
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