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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 8
स्थानेऽष्टमे गुरुबुधौ नियतं वियोग मृत्युं शशी भृगुसुतश्च तथैव राहुः । सूर्यः करोत्यविधवां सरुजां महीजः सूर्वात्मजो धनवतीं पतिवल्लभां च ॥
यदि विवाहकाल में लग्न से अष्टम भाव में गुरु या बुध हो तो खो का पति से वियोग, चन्द्र, शुक्र या राहु हो तो मृत्यु, सूर्य हो तो सौभाग्यवती, मंगल हो तो रुग्णा तथा शनि हो तो धन से युत और पतिवत्तभा कराता है।
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