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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 6
षष्ठाश्रिताः शनिदिवाकरराहुजीवाः कुर्युः कुजश्च सुभगां श्वशुरेषु भक्ताम्। चन्द्रः करोति विधवामुशना दरिद्रा- मृद्धां शशाङ्कतनयः कलहप्रियां च ॥
यदि विवाहकाल में लग्न से षष्ठ भाव में शनि, सूर्य, राहु, गुरु या मंगल हो श्वशुर कॉ सेवा करने वालो, चन्द्र हो तो विधवा, शुक्र हो तो निर्धन तथा युध हो तो धन से युत और कलहकारिणी खी होती है।
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