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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 5
नष्टात्मर्जा रविकुजौ खलु चन्द्रात्मजो बहुसुतां गुरुभार्गवी राहुर्ददाति मरणं शनिरुप्ररोगं कन्याविनाशमचिरात् कुरुते शशाङ्कः ॥
जिसके विवाहकाल में लग्न से पञ्चम स्थान में रवि या मंगल हो तो उसकी सन्तान मर जाती है। बुध, गुरु और शुक्र हो तो बहुत सन्तान, राहु हो तो मृत्यु, शनि हो तो कठोर रोग तथा चन्द्र हो तो शीघ्र ही कन्या का नाश करता है।
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