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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 4
स्वल्पं पयः स्रवति सूर्यसुते दौर्भाग्यमुष्णकिरणः कुरुते शशी च। चतुर्थे राहुः सपत्नमपि च क्षितिजोऽल्पवित्तं दद्याद्धगुः सुरगुरुच बुधश्च सौख ५ ॥
जिसके विवाहकाल में लग्न से चतुर्थ स्थान में शनि हो, उसके स्तनों से बहुत थोड़ा दूप निकलता है। सूर्य या चन्द्र हो तो भाग्यरहित, राहु हो तो सौत (सौतिन ) चाली, मंगल हो तो अल्प धन बाली तथा शुक्र, बृहस्पति या बुध हो तो सुख भोगने बालो खी होती है।
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