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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 3
सूर्येन्दुभौमगुरुशुक्रबुधास्तृतीये कुर्युः सदा बहुसुतां धनभागिनीं च। व्यक्तां दिवाकरसुतः सुभगां करोति मृत्युं ददाति नियमात् खलु सैहिकेयः ॥
यदि विवाहकाल में लग्न से तृतीय भाव में सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र या बुध हो तो अधिक सन्तान वाली और धन से युत, शनि हो तो कोर्ति से युत और सुभगा तथा राहु हो तो निश्चय ही मृत्यु को प्राप्त करने वाली स्त्री होती है।
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