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बृहत्संहिता • अध्याय 103 • श्लोक 11
आये रविर्वहुसुतां सघनां शशाङ्कः पुत्रान्वितां आयुष्मतीं क्षितिसुतो रविजो धनराळ्याम्। सुरगुरुः शशिजः समृद्धां राहुः करोत्यविधवां भृगुरर्थयुक्ताम् ॥
यदि चैवाहिक लग्न से एकादश भाव में रवि हो तो बहुत पुत्र वाली, चन्द्र हो तो धन से युत, मंगल हो तो पुत्र से युतं, शनि हो तो धनाढ्य, बृहस्पति हो हो बहुत दिन तक जोधित रहने वाली, बुध हो तो धन से पुत, राहु हो तो पतियुक्त और शुक्र हो तो धन से युत त्रो को करता है।
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