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बृहत्संहिता • अध्याय 102 • श्लोक 4
तौलिनि चित्रान्त्यार्ध स्वातिः पादत्रयं विशाखायाः । अलिनि विशाखापादस्तथानुराधान्विता ज्येष्ठा ॥
चित्रा का शेष दो पाद, स्वाति का चार पाद और विशाखा का आद्य तीन पाद तुला राशि का तथा विशाखा का शेष एक पाद, अनुराधा का चार पाद और ज्येष्ठा का चार पाद वृश्चिक राशि का होता है।
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