रोहिणी, तीनों उत्तरा, रेवती, मृगशिरा, मूल, अनुराधा, मघा, हस्त और स्वाती नहरों में; कन्या, तुता और मिथुन लग्नों में एवं सपाम, अहम और द्वादश स्थानों से भित्र स्थानों में शुभ ग्रह से, एकादश, द्वितीय या तृतीय स्थानों में चन्द्र हो, तृतीय, पा और एकादश में पाप ग्रह हों तथा यह में शुक्र और अहम में मंगल न हो तो विवाह शुभ होता है। वा, कन्या दोनों में से किसी एक की राशि से दूसरे की राशि दूसरी, नमों और आठयों न हो अर्थात् द्विद्वादश, नवमयम और षट्काटक राशि से रहित राशि हो, सूर्य करानुकूल (तृतीय, षठ, दशम या एकादश स्थान में स्थित) हो,
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