लाभे तृतीये च शुभैः समेते पापैर्विहीने शुभराशिलग्ने । वेच्यौ च कर्णावमरेज्यलग्ने पुष्येन्दुचित्राहरिपौष्णभेषु ॥
लग्न से ग्यारहवें और तीसरे में शुभ ग्रह हों, शुभ ग्रह की राशि (वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न में हो, पाप ग्रह (सूर्य, मंगल और शनि से रहित होकर लग्न बृहस्पति से युत हो तथा पुष्य, मृगशिरा, चित्रा, श्रवण और रेवती नक्षत्रों में कर्णवेध शुभ होता है।
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