शकुनि करण में पौष्टिक कार्य, औषधिसेवन आदि, मूल ( जड़ को लेना, रोपना, खाना) और मन्त्रसाधनसम्बन्धी कार्य करना शुभ है। चतुष्पद करण में गाय, ब्राह्मण, पितर और राज्यसम्बन्धी कार्य करना शुभ है। नाग करण में स्थावर, दारुण, हरण और दौर्भाग्य (जिस कार्य को करने से दूसरे से द्वेष उत्पन हो, उसके) सम्बन्धी कार्य करना शुभ है तथा किंस्तुघ्न करण में धर्म, इष्टि (पुत्रकाम्य आदि), पुष्टि (शरीरपुष्टि), मंगल (विवाह आदि) और सिद्धिक्रिया (जिस क्रिया को करने से कार्य की सिद्धि हो, उसके) सम्बन्धी कार्य करना शुभ है।
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