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बृहत्संहिता • अध्याय 10 • श्लोक 21
वैदूर्यकान्तिविमलः शुभकृत् प्रजानां बाणातसीकुसुमवर्णनिभश्च शस्तः । यं चापि वर्णमुपगच्छति तत्सवर्णान् सूर्यात्मजः क्षयतीति मुनिप्रवादः ॥
ऋषि-मुनियों की परंपरा है कि यदि शनि बेरी के समान चमकीला हो तो वह लोगों को सुख प्रदान करता है। इसी प्रकार, यदि वह बाणा फूल की तरह गहरा काला या अतसी फूल की तरह गहरा नीला हो तो वह शुभ होता है। शनि जिस भी रंग को धारण करता है, वह उस रंग के प्रतिनिधित्व वाले लोगों के उस वर्ग के लिए विनाशकारी साबित होता है, अर्थात सफेद - ब्राह्मण, लाल - क्षत्रिय, पीला - वैश्य और काला - शूद्र।
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