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ब्रह्म सूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 186
ॐ एवं मुक्तिफलानिय मस्तदवस्था वधृतेस्तदवस्था वधृतेः ॐ ॥ ३।४।५२॥ इति श्रीमत्कृष्णद्वैपायनकृत ब्रह्मसूत्रेषु तृतीयाध्यायस्य चतुर्थः पादः समाप्तः ॥ इति तृतीयोऽध्यायः॥
मोक्ष नामक फल के सम्बन्ध में इस प्रकार का कोई नियम नहीं है, क्योंकि वह अवस्था निश्चय ही निश्चित (समान) हो गई है।
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