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ब्रह्म सूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 77
ॐ करणवच्चेन्न भोगादिभ्यः ॐ ॥
यदि यह तर्क किया जाय कि ईश्वर प्रकृति को इन्द्रियों की भाँति निर्देशित करेगा तो ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इससे ईश्वर को (सुख, दु:ख आदि) अनुभूतियाँ होंगी। (अथवा) यदि इन्द्रियों से युक्त शरीर को ईश्वर मान लिया जाय, (हम कहते हैं कि) यह सम्भव नहीं है; (परिणामस्वरूप) अनुभवों आदि के कारण।
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