मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 9
मायातत्कार्यदेहादि मम नास्त्येव सर्वदा । स्वप्रकाशैकरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मेरे लिए शरीर जैसी न तो कोई माया है और न ही उसके प्रभाव। मैं उसी स्वभाव का और स्वयं प्रकाशमान हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ब्रह्मज्ञानावलीमाला के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें