मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 7
तत्वातीतः परात्माऽहं मध्यातीतः परश्शिवः । मायातीतः परञ्ज्योतिरहमेवाहमव्ययः ॥
मैं सभी श्रेणियों (जैसे प्रकृति, महत्, अहंकार, आदि) से परे सर्वोच्च आत्मा हूँ। मैं मध्यस्थों से परे परम मंगलमय हूँ। मैं माया से परे हूँ। मैं परम प्रकाश हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ब्रह्मज्ञानावलीमाला के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें