मैं सभी श्रेणियों (जैसे प्रकृति, महत्, अहंकार, आदि) से परे सर्वोच्च आत्मा हूँ। मैं मध्यस्थों से परे परम मंगलमय हूँ। मैं माया से परे हूँ। मैं परम प्रकाश हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
ब्रह्मज्ञानावलीमाला के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।