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ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 3
नित्यशुद्धविमुक्तोऽहं निराकारोऽहमव्ययः । भूमानन्दस्वरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं शाश्वत हूँ, मैं शुद्ध हूँ (माया के नियंत्रण से मुक्त)। मैं सदैव मुक्त हूँ। मैं निराकार, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ। मैं अनंत आनंद स्वरूप हूं। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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