मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 20
ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः । अनेन वेद्यं सच्छास्त्रमिति वेदान्तडिण्डिमः ॥
ब्रह्म वास्तविक है, ब्रह्मांड मिथ्या है (इसे वास्तविक या अवास्तविक के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है)। जीव स्वयं ब्रह्म है, भिन्न नहीं। इसे ही सही शास्त्र समझना चाहिए। ऐसा वेदान्त ने घोषित किया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ब्रह्मज्ञानावलीमाला के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ब्रह्मज्ञानावलीमाला के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें