निराधारस्वरूपोऽहं सर्वाधारोऽहमेव च ।
आप्तकामस्वरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं बिना किसी सहारे के हूँ और मैं ही सबका सहारा हूँ। मेरी कोई इच्छा नहीं है। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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