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ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 13
द्वन्द्वादिसाक्षिरूपोऽहमचलोऽहं सनातनः । सर्वसाक्षिस्वरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं सभी विपरीत युग्मों का साक्षी हूँ। मैं अचल हूँ। मैं शाश्वत हूँ। मैं हर चीज़ का गवाह हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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