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ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 12
निष्कलोऽहं निष्क्रियोऽहं सर्वात्माऽऽद्यस्सनातनः । अपरोक्षस्वरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं अंशों से रहित हूँ। मैं क्रियाहीन हूँ। मैं सबका आत्मस्वरूप हूँ। मैं ही प्रारम्भिक हूँ। मैं प्राचीन, शाश्वत हूँ। मैं प्रत्यक्ष रूप से अंतर्ज्ञानी हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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