गुणत्रयव्यतीतोऽहं ब्रह्मादीनां च साक्ष्यहम् ।
अनन्तानन्तरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं तीन गुणों - सत्व, रज और तम से परे हूँ। मैं ब्रह्मा आदि का भी साक्षी हूँ। मैं अनंत आनंद स्वरूप हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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