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ब्रह्मज्ञानावलीमाला • अध्याय 1 • श्लोक 10
गुणत्रयव्यतीतोऽहं ब्रह्मादीनां च साक्ष्यहम् । अनन्तानन्तरूपोऽहमहमेवाहमव्ययः ॥
मैं तीन गुणों - सत्व, रज और तम से परे हूँ। मैं ब्रह्मा आदि का भी साक्षी हूँ। मैं अनंत आनंद स्वरूप हूँ। मैं ही आत्मा, अविनाशी और परिवर्तनहीन हूँ।
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