कुटीचका नाम गौतमभरद्वाजयाज्ञवल्क्यवसिष्ठप्रभृतयोऽष्टौ ग्रासांश्चरन्तो योगमार्गे मोक्षमेव प्रार्थयन्ते ॥
कुटीचक भिक्षुगौतम, भरद्वाज, याज्ञवल्क्य और वसिष्ठ आदि के समान अष्टग्रास भोजन ग्रहण करके योगमार्ग(योग के माध्यम से) द्वारा मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं।
(केवल शरीर-रक्षा के लिए न्यूनतम भोजन का एक मान अष्टग्रास माना गया है। एक ग्रास उतना अन्न है, जिसे एक बार में मुख में रखकर चबाया जा सके। ऐसे आठ ग्रास भोजन से शरीर की रक्षा संभव है—ऐसे अनुभव के आधार पर यह नियम बनाया गया प्रतीत होता है।)
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