मनोवशेऽन्ये ह्यभवन्स्म देवा मनश्च नान्यस्य वशं समेति ।
भीष्मो हि देवः सहसः सहीयान्युञ्ज्याद्वशे तं स हि देवदेवः ॥
सभी इन्द्रियाँ मन के वश में हैं।
मन किसी भी इन्द्रिय के वश में नहीं है।
यह मन बलवान्से भी बलवान्, अत्यन्त भयंकर देव है।
जो इसको अपने वश में कर लेता है, वही देव-इन्द्रियों का विजेता है।
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