दानं स्वधर्मो नियमो यमश्च श्रुतं च कर्माणि च सद्व्रतानि ।
सर्वे मनोनिग्रहलक्षणान्ताः परो हि योगो मनसः समाधिः ॥
दान, अपने धर्म का पालन, नियम, यम, वेदाध्ययन, सत्कर्म और ब्रह्मचर्यादि श्रेष्ठ व्रत - इन सब का अन्तिम फल यही है कि मन एकाग्र हो जाय, भगवान्में लग जाय। मन का समाहित हो जाना ही परम योग है।
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