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भिक्षुगीता • अध्याय 1 • श्लोक 19
तस्मात्सर्वात्मना तात निगृहाण मनो धिया । मय्यावेशितया युक्त एतावान्योगसङ्ग्रहः ॥
इसलिये प्यारे उद्धव! अपनी वृत्तियों को मुझ में तन्मय कर दो और इस प्रकार अपनी सारी शक्ति लगाकर मन को वश में कर लो और फिर मुझमें ही नित्ययुक्त होकर स्थित हो जाओ। बस, सारे योगसाधन का इतना ही सार-संग्रह है।
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