बड़े-बड़े प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इस परमात्मनिष्ठा का आश्रय ग्रहण किया है। मैं भी इसी का आश्रय ग्रहण करूँगा और मुक्ति तथा प्रेम के दाता भगवान् के चरणकमल की सेवा के द्वारा ही इस दुरन्त अज्ञानसागर को अनायास ही पार कर लूँगा।
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