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भज गोविन्दम् • अध्याय 1 • श्लोक 31
प्राणायामं प्रत्याहारं, नित्यानित्य विवेकविचारम्। जाप्यसमेत समाधिविधानं, कुर्ववधानं महदवधानम्॥
प्राणायाम, प्रत्याहार (उचित आहार), नित्य इस संसार की अनित्यता का विवेक पूर्वक विचार करो, प्रेम से प्रभु-नाम का जाप करते हुए समाधि में ध्यान दो, बहुत ध्यान दो।
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