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भज गोविन्दम् • अध्याय 1 • श्लोक 24
कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः, का मे जननी को मे तातः। इति परिभावय सर्वमसारम्, विश्वं त्यक्त्वा स्वप्न विचारम्॥
तुम कौन हो, मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ, मेरी माँ कौन है, मेरा पिता कौन है? सब प्रकार से इस विश्व को असार समझ कर इसको एक स्वप्न के समान त्याग दो।
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