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भज गोविन्दम् • अध्याय 1 • श्लोक 21
भगवद् गीता किञ्चिदधीता, गङ्गा जललव कणिकापीता। सकृदपि येन मुरारि समर्चा, क्रियते तस्य यमेन न चर्चा॥
जिन्होंने भगवद् गीता का थोडा सा भी अध्ययन किया है, भक्ति रूपी गंगा जल का कण भर भी पिया है, भगवान कृष्ण की एक बार भी समुचित प्रकार से पूजा की है, यम के द्वारा उनकी चर्चा नहीं की जाती है।
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