श्री भगवानुवाच
अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते।
भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः।।
श्रीभगवान् बोले - परम अक्षर ब्रह्म है और जीव का अपना जो होनापन है, उसको अध्यात्म कहते हैं। प्राणियों का उद्भव (सत्ता को प्रकट) करने वाला जो त्याग है उसको कर्म कहा जाता है।
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