अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन।
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः।।
यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देह में कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरण वाले) मनुष्य के द्वारा अन्तकाल में आप कैसे जानने में आते हैं?
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