ब्रह्माजी के दिन के आरम्भकाल में अव्यक्त- (ब्रह्माजी के सूक्ष्म-शरीर) से सम्पूर्ण प्राणी पैदा होते हैं और ब्रह्माजी की रात के आरम्भकाल में उसी अव्यक्त में सम्पूर्ण प्राणी लीन हो जाते हैं।
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