साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः।
प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः।।
जो मनुष्य अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के सहित मुझे जानते हैं, वे युक्तचेता मनुष्य अन्तकाल में भी मुझे ही जानते हैं अर्थात् प्राप्त होते हैं।
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