शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात्।
कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः।।
इस मनुष्य-शरीर में जो कोई (मनुष्य) शरीर छूटने से पहले ही काम-क्रोध से उत्पन्न होने वाले वेग को सहन करने में समर्थ होता है, वह नर योगी है और वही सुखी है।
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