जिनकी बुद्धि तदाकार हो रही है, जिनका मन तदाकार हो रहा है, जिनकी स्थिति परमात्मतत्व में है, ऐसे परमात्मपरायण साधक ज्ञान के द्वारा पाप रहित होकर अपुनरावृत्ति (परमगति) को प्राप्त होते हैं।
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