यज्ज्ञात्वा न पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव।
येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि।।
जिसे जान लेने के बाद हे पाण्डव, तुम फिर कभी इस प्रकार मोह को प्राप्त नहीं होगे। उस ज्ञान से तुम समस्त भूतों को पहले अपने भीतर और फिर मुझमें भी देखोगे।
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