मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
भगवद गीता • अध्याय 4 • श्लोक 34
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।।
उस ज्ञान को प्रणिपात (नम्रता), परिप्रश्न (जिज्ञासा) और सेवा के माध्यम से प्राप्त करो। तत्त्वदर्शी ज्ञानियों से तुम्हें वह ज्ञान प्राप्त होगा, जो तुम्हें उपदेश करेंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें