नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।।
तुम अपने नियत कर्तव्य कर्म का पालन करो, क्योंकि कर्मअकर्म(कर्तव्य का त्याग) से श्रेष्ठ है। और कर्म न करने से तुम्हारी शरीर-यात्रा(जीवन-निर्वाह) भी सफल नहीं हो सकती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।