अतः, हे भरतर्षभ! तुम पहले इन्द्रियों को वश में करके, इस पापरूप शत्रु(काम) का नाश करो; क्योंकि यह ज्ञान और विज्ञान(अनुभवजन्य ज्ञान)—दोनों का विनाश करने वाला है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।