मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
भगवद गीता • अध्याय 3 • श्लोक 39
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा। कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च।।
हे कौन्तेय! यह कामरूप (कामना के रूप में प्रकट होने वाला), कभी न तृप्त होने वाला अग्नि के समान (दुष्पूर अनल) तथा ज्ञानी पुरुष का नित्य शत्रु है। इसी के द्वारा ज्ञान आच्छादित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें