हे कौन्तेय! यह कामरूप(कामना के रूप में प्रकट होने वाला), कभी न तृप्त होने वाला अग्नि के समान(दुष्पूर अनल) तथा ज्ञानी पुरुष का नित्य शत्रु है। इसी के द्वारा ज्ञान आच्छादित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
भगवद गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
भगवद गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।